un ko mere zabt-e-gham se bhi gilaa rah jaayega | उन को मेरे ज़ब्त-ए-ग़म से भी गिला रह जाएगा

  - Parveen Mirza
उनकोमेरेज़ब्त-ए-ग़मसेभीगिलारहजाएगा
मुश्किलेंजबख़त्महोंगीहौसलारहजाएगा
रफ़्तारफ़्तादिलभीठहराआँखसेआँसूरुके
हमयेसमझेथेकियेग़मजानलेकरजाएगा
एकइककरकेज़मींसेसबगलेमिलजाएँगे
जाने-पहचानोंसेरिश्तायादकारहजाएगा
मंज़िलोंकीख़्वाहिशेंजबतोड़देंगीदिलमेंदम
जानेवालोंकेलिएबसरास्तारहजाएगा
आपकीआँखोंमेंउतराहैतोउजलाहोगया
क्याख़बरथीअक्समेराआइनाहोजाएगा
निस्बतेंहमसेज़मींकीछिनगईं'परवीं'तोक्या
आसमानोंसेहमाराराब्तारहजाएगा
  - Parveen Mirza
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