udhar ruki hui hai raat jugnuon ka raqs hai | उधर रुकी हुई है रात जुगनुओं का रक़्स है

  - Parnav Mishra Tejas
उधररुकीहुईहैरातजुगनुओंकारक़्सहै
इधरनदीकेहुस्नपरसियाहियोंकारक़्सहै
छिपीहुईहैचाँदनीसफ़ेदबादलोंकेबीच
सुकूतकीइमारतोंपेबिजलियोंकारक़्सहै
उतरतीतैरतीनज़रयेयाद-ए-यारकासफ़र
इसीख़लाकेदरमियानअज़दहोंकारक़्सहै
जहाँसेख़त्महोरहीवहींसेफिरबनीनई
मिरीउजाड़फ़िक्रमेंतबाहियोंकारक़्सहै
नईरुतोंकीमौजमेंपुरानेग़मकीदास्ताँ
सोकुछनयानहींहैदोस्तज़ावियोंकारक़्सहै
  - Parnav Mishra Tejas
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