ghamon ke andheron men gharqaab hooñ main | ग़मों के अँधेरों में ग़र्क़ाब हूँ मैं

  - Parkash Tiwari
ग़मोंकेअँधेरोंमेंग़र्क़ाबहूँमैं
अमावसकाबिखराहुआख़्वाबहूँमैं
मिरेनामसेहैज़मानेकोनफ़रत
किप्यालेमेंहस्तीकेज़हराबहूँमैं
जमीहैउमीदोंपेहिरमाँकीकाई
किसहराकाइकख़ुश्कतालाबहूँमैं
क़लम-बंदहैंजिसमेंरूहोंकेक़िस्से
किताब-ए-ज़मानाकावोबाबहूँमैं
पड़ाहैजोखाईमेंतारीकियोंकी
मुरादोंकावोनख़्ल-ए-शादाबहूँमैं
तुझेज़ीस्तकीहरख़ुशीहोमुयस्सर
मिराग़मकरशाद-ओ-शादाबहूँमैं
तआ'रुफ़मिराक्याहैपूछो'प्रकाश'
वफ़ानामहैऔरनायाबहूँमैं
  - Parkash Tiwari
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