shaam-e-furqat mila ye sahaara mujhe | शाम-ए-फ़ुर्क़त मिला ये सहारा मुझे

  - Parkash Nath Parvez
शाम-ए-फ़ुर्क़तमिलायेसहारामुझे
बारहाबे-कसीनेपुकारामुझे
गयाहाथमेंजाम-ए-कैफ़-आफ़रीं
मिलगयाहिज्र-ए-ग़मकाकिनारामुझे
करगयाबे-नियाज़-ए-ग़म-ए-ईन-ओ-आँ
उनकीदिलकशनज़रकाइशारामुझे
इंक़लाब-ए-मोहब्बतयेक्याहोगया
उनकाग़मभीनहींअबगवारामुझे
तेरेजलवोंकोथीजबमिरीजुस्तुजू
यादहैआजतकवोनज़ारामुझे
लाखहोज़ेरफिरभीग़म-ए-ज़िंदगी
सौसहारोंकाहैइकसहारामुझे
रोज़-अफ़्ज़ूँहैबेचारगीइश्क़की
सूझताहीनहींकोईचारामुझे
कहदियाउनसे'परवेज़'सबहाल-ए-दिल
ख़ामुशीदेगईहैसहारामुझे
  - Parkash Nath Parvez
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