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Paras Angral
tere hone se raushni hogii
tere hone se raushni hogii | तेरे होने से रौशनी होगी
- Paras Angral
तेरे
होने
से
रौशनी
होगी
वर्ना
तो
दिन
में
तीरगी
होगी
ज़िन्दगी
जिस
तरह
हुई
रुख़्सत
उसकी
भी
कोई
बेबसी
होगी
मैं
इसी
सम्त
ही
तो
बैठा
हूँ
तेरी
जिस
सम्त
वापसी
होगी
तेरे
क़दमों
की
आहटें
अब
भी
इन
दरख़्तों
ने
रख
रखी
होगी
चुप
रहा
मैं
तो
बस
इसी
ख़ातिर
तू
समझ
लेगा
दोस्ती
होगी
तेरे
आने
का
वक़्त
क्या
देखें
ये
घड़ी
ख़ुद
ही
गिन
चुकी
होगी
और
तो
साथ
क्या
रहा
पारस
साथ
तेरे
तो
बेरुख़ी
होगी
- Paras Angral
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मैं
इसी
सम्त
ही
तो
बैठा
हूँ
तेरी
जिस
सम्त
वापसी
होगी
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पास
होना
उसका
काफ़ी
होता
है
यूँँही
तो
बस
जीना
काफ़ी
होता
है
हो
महल
गर
तो
भी
कम
पड़
जाता
है
रहने
को
इक
कमरा
काफ़ी
होता
है
ये
ज़रूरी
तो
नहीं
हासिल
भी
हो
चाँद
का
बस
दिखना
काफ़ी
होता
है
हँसने
को
तो
दुनिया
कम
पड़
जाती
है
रोने
को
इक
कंधा
काफ़ी
होता
है
ग़ैरों
पर
पारस
यक़ीं
हो
जाता
है
धोखे
को
इक
अपना
काफ़ी
होता
है
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मसअला
दिल
का
कभी
हल
न
हुआ
एक
वो
शे'र
मुकम्मल
न
हुआ
शख़्स
ऐसा
न
अता
करना
ख़ुदा
आज
मेरा
हुआ
पर
कल
न
हुआ
मसअला
गर
जुदा
होने
का
था
बे-वफ़ाई
तो
कोई
हल
न
हुआ
आज़माना
था
तुझे
भी
जहाँ
ने
इस
में
क्या
आज
तू
अव्वल
न
हुआ
उसकी
आँखों
को
था
तकना
पारस
और
ये
काम
मुसलसल
न
हुआ
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मैं
तुम्हें
ही
जानता
हूँ
कुछ
न
गर
मैं
मानता
हूँ
लाख
चेहरों
में
वो
इक
को
दूर
से
पहचानता
हूँ
और
तो
कोई
नहीं
पर
माँ
तुझे
रब
मानता
हूँ
जो
हक़ीक़त
में
नहीं
है
ख़्वाब
में
वो
जानता
हूँ
नाम
बेशक
लूँ
न
उसका
ख़ूनी
को
पहचानता
हूँ
सच
उसे
'पारस'
कहूँगा
दिल
में
तो
ये
ठानता
हूँ
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ग़र
ये
तमाशा
शहर
में
यूँँ
ही
लगा
रहे
कुछ
देर
देख
कर
कहूँ
अब
छोड़
देता
हूँ
Paras Angral
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