na gire kahii na hare hue kaii saal se | न गिरे कहीं न हरे हुए कई साल से

  - Paras Mazari
गिरेकहींहरेहुएकईसालसे
यूँँहीख़ुश्कपातजुड़ेरहेतिरीडालसे
कोईलम्सथाजोसरापाआँखबनारहा
कोईफूलझाँकतारहगयाकिसीशालसे
तिरीकाएनातसेकुछज़ियादातलबनहीं
फ़क़तएकमोतीहीमोतियोंभरेथालसे
तूवोसाहिराकितिलिस्मतेराउरूजपर
मैंवोआगहूँजोबुझेगीतेरेज़वालसे
तिरेमौसमोंकेतग़य्युरातअजीबहैं
मैंक़बाबनानेलगाहूँपेड़कीछालसे
  - Paras Mazari
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