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Roza Ahmad 'Aawaaz'
noor ghaafil hua lau bujaaye baghair
noor ghaafil hua lau bujaaye baghair | नूर ग़ाफ़िल हुआ लौ बुझाए बग़ैर
- Roza Ahmad 'Aawaaz'
नूर
ग़ाफ़िल
हुआ
लौ
बुझाए
बग़ैर
लड़खड़ाए
क़दम
हैं
पिलाए
बग़ैर
कर
दिया
ग़ैर
फ़ेहरिस्त
में
मुत्तहिद
हो
गए
दूर
वो
आज़माए
बग़ैर
इश्क़
है
तो
सनम
सब्र
भी
कर
लिया
तिलमिलाते
हैं
आँसू
बहाए
बग़ैर
मान
जाते
बड़ी
शख़्सियत
आप
की
क्या
कभी
की
मदद
यूँँ
जताए
बग़ैर
- Roza Ahmad 'Aawaaz'
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यार
पहले
ये
ग़म
विदा
कर
दो
फिर
चलो
दूर-अज़-दवा
कर
दो
रास
आती
नहीं
मुहब्बत
अब
मामला
ये
रफ़ा-दफ़ा
कर
दो
ख़्वाहिशें
जो
रखी
मियाँ
ऊँची
सादगी
को
ज़रा
जुदा
कर
दो
भीड़
से
कुछ
हुआ
नहीं
हासिल
ख़ुद
से
ख़ुद
के
लिए
दु'आ
कर
दो
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तन्हाई
सहन
के
पार
हो
रही
है
ये
ज़िंदगी
अदाकार
हो
रही
है
ये
कैफ़ियत
हुई
है
अजीब
जब
से
तकलीफ़
भी
बहुत
यार
हो
रही
है
सिगरेट
और
तुम
याद
आ
रहे
हो
हाँ
रूह
अब
तलबगार
हो
रही
है
लड़की
जिसे
सदा
भीड़
रास
आईं
तन्हाई
में
गिरफ़्तार
हो
रही
है
आवाज़
ज़िन्दगी
ख़त्म
कब
हो
जाए
ये
मौत
से
भी
दो
चार
हो
रही
है
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रात
काली
को
बस
चाँदनी
चाहिए
मुफ़्लिसी
में
ज़रा
धाँधली
चाहिए
Roza Ahmad 'Aawaaz'
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अफ़सरी
थी
कभी
इब्तिदा
आरज़ू
जेब
ख़ाली
को
अब
नौकरी
चाहिए
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तुम
को
दिया
है
हक़
जताने
का
जताया
भी
करो
है
शौक़
जो
दिल
को
लगाने
का
लगाया
भी
करो
Roza Ahmad 'Aawaaz'
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