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Roza Ahmad 'Aawaaz'
raat kaali ko bas chaandni chahiye
raat kaali ko bas chaandni chahiye | रात काली को बस चाँदनी चाहिए
- Roza Ahmad 'Aawaaz'
रात
काली
को
बस
चाँदनी
चाहिए
मुफ़्लिसी
में
ज़रा
धाँधली
चाहिए
- Roza Ahmad 'Aawaaz'
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तुम
को
दिया
है
हक़
जताने
का
जताया
भी
करो
है
शौक़
जो
दिल
को
लगाने
का
लगाया
भी
करो
Roza Ahmad 'Aawaaz'
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कौन
जुगनू
यहाँ
कौन
तारा
भला
फ़र्क
मुमकिन
नहीं
जगमगाए
बग़ैर
Roza Ahmad 'Aawaaz'
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तन्हाई
सहन
के
पार
हो
रही
है
ये
ज़िंदगी
अदाकार
हो
रही
है
ये
कैफ़ियत
हुई
है
अजीब
जब
से
तकलीफ़
भी
बहुत
यार
हो
रही
है
सिगरेट
और
तुम
याद
आ
रहे
हो
हाँ
रूह
अब
तलबगार
हो
रही
है
लड़की
जिसे
सदा
भीड़
रास
आईं
तन्हाई
में
गिरफ़्तार
हो
रही
है
आवाज़
ज़िन्दगी
ख़त्म
कब
हो
जाए
ये
मौत
से
भी
दो
चार
हो
रही
है
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Roza Ahmad 'Aawaaz'
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अफ़सरी
थी
कभी
इब्तिदा
आरज़ू
जेब
ख़ाली
को
अब
नौकरी
चाहिए
Roza Ahmad 'Aawaaz'
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यार
पहले
ये
ग़म
विदा
कर
दो
फिर
चलो
दूर-अज़-दवा
कर
दो
रास
आती
नहीं
मुहब्बत
अब
मामला
ये
रफ़ा-दफ़ा
कर
दो
ख़्वाहिशें
जो
रखी
मियाँ
ऊँची
सादगी
को
ज़रा
जुदा
कर
दो
भीड़
से
कुछ
हुआ
नहीं
हासिल
ख़ुद
से
ख़ुद
के
लिए
दु'आ
कर
दो
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Roza Ahmad 'Aawaaz'
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