ज़मींपेबैठकेबे-इख़्तियारढूँढताहूँ
मैंआसमानकागर्द-ओ-ग़ुबारढूँढताहूँ
मुझेपताहैकिसीमेंयेशयनहींमौजूद
हरएकशख़्समेंक्यूँँए'तिबारढूँढताहूँ
अकेलाबैठकेमस्जिदकेएककोनेमें
कमालकरताहूँपर्वरदिगारढूँढताहूँ
किआइनेमेंकईआईनेकिएतख़्लीक़
सोएकचेहरेमेंचेहरेहज़ारढूँढताहूँ
तुम्हारीयादतोरक्खीहैजेबमेंमैंने
येक्यूँँइधरसेउधरबारबारढूँढताहूँ
मैंऐसेआलम-ए-वहशतमेंहूँकितन्हाई
पुकारतीहैमुझेमैंपुकारढूँढताहूँ
मिरेलिएतोख़त-ए-इंतिज़ारखींचतीहै
तिरेलिएमैंख़त-ए-इंतिज़ारढूँढताहूँ