main ne sun rakkhi hai sahab ek kahaanii dariyaa ki | मैं ने सुन रक्खी है साहब एक कहानी दरिया की

  - Osaama ameer
मैंनेसुनरक्खीहैसाहबएककहानीदरियाकी
शामकिनारेबैठकेइकदिनवोभीज़बानीदरियाकी
वर्नाहमभीआईनेकेभेदसेवाक़िफ़होजाते
हमनेअपनीमन-मानीकीएकमानीदरियाकी
रेतकेछोटेटुकड़ेपरहीआबादीमक़्सूदहुई
उसीबहानेचारोंजानिबहैसुलतानीदरियाकी
आँखेंहीइज़हारकरेंतोशायदकोईबातबने
सूरजढलतेवक़्तजोदेखीथीवीरानीदरियाकी
सुब्ह-ए-अज़लसेएकहीजैसेमिलतेजुलतेदरियाहैं
किसनेदेखीकिसनेजानीशक्लपुरानीदरियाकी
सात-समुंदरदेखनेलगगएअपनेबुढ़ापेकीझुरियाँ
अपनेजोबनपरजबआईशोख़जवानीदरियाकी
  - Osaama ameer
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