jo nahin hai usii khule dar ko | जो नहीं है उसी खुले दर को

  - Om Prabhakar
जोनहींहैउसीखुलेदरको
जारहाहूँमैंछोड़करघरको
अपनीदहलीज़सेमैंता-मंज़िल
ढूँढताहीरहाहूँरहबरको
क्याकरूँँजाकेक़ब्रमेंलेटूँ
कैसेभूलूँमैंमौतकेडरको
तूभीआताहैसाथ-साथकिजब
यादकरताहूँअपनेदिलबरको
जारहीहैख़िज़ाँबग़ीचेसे
छोड़करदामन-ए-मोअ'त्तरको
यादकरताहैरातभरअंबर
तीरखाएपरिंदकेपरको
  - Om Prabhakar
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