hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Nityanand Vajpayee
vo mujhko dekh kar kuchh aise chanchal ho u
vo mujhko dekh kar kuchh aise chanchal ho u | वो मुझको देख कर कुछ ऐसे चंचल हो उठी थी
- Nityanand Vajpayee
वो
मुझको
देख
कर
कुछ
ऐसे
चंचल
हो
उठी
थी
कोई
सूखी
नदी
ज्यूँ
जल
से
अविरल
हो
उठी
थी
चमकते
चंद्रमा
की
चाँदनी
में
ज्यूँ
चकोरी
नहा
धोकर
के
महकी
और
निर्मल
हो
उठी
थी
- Nityanand Vajpayee
Download Sher Image
जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
Send
Download Image
31 Likes
उतरी
हुई
नदी
को
समुंदर
कहेगा
कौन
सत्तर
अगर
हैं
आप
बहत्तर
कहेगा
कौन
पपलू
से
उनकी
बीवी
ने
कल
रात
कह
दिया
मैं
देखती
हूँ
आपको
शौहर
कहेगा
कौन
Read Full
Paplu Lucknawi
Send
Download Image
26 Likes
एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
Send
Download Image
33 Likes
इक
रोज़
इक
नदी
के
किनारे
मिलेंगे
हम
इक
दूसरे
से
अपना
पता
पूछते
हुए
Shahbaz Rizvi
Send
Download Image
38 Likes
मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
Read Full
Nirvesh Navodayan
Send
Download Image
7 Likes
इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
Send
Download Image
33 Likes
बातचीत
में
आला
हो
बस
ठीक
न
हो
फ़ाइदा
क्या
महबूब
अगर
बारीक
न
हो
हम
तेरी
क़ुर्बत
में
अक्सर
सोचते
हैं
दरिया
खेत
के
इतना
भी
नज़दीक
न
हो
Read Full
Khurram Afaq
Send
Download Image
36 Likes
तुम
ने
किया
है
तुम
ने
इशारा
बहुत
ग़लत
दरिया
बहुत
दुरुस्त
किनारा
बहुत
ग़लत
Nabeel Ahmed Nabeel
Send
Download Image
24 Likes
हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
Send
Download Image
370 Likes
उसी
वक़्त
अपने
क़दम
मोड़
लेना
नदी
पार
से
जब
इशारा
करूँँगा
Siddharth Saaz
Send
Download Image
41 Likes
Read More
मुहब्बत
के
महताब
से
जो
हैं
झुलसे
उन्हें
रास
आएँगी
ग़ज़लें
ये
मेरी
Nityanand Vajpayee
Send
Download Image
4 Likes
फ़ज़ा
में
गुल
खिलाना
चाहता
हूँ
मैं
ख़ुद
को
फिर
लुटाना
चाहता
हूँ
ग़ज़ल
तुम
पर
सुनाना
चाहता
हूँ
हुनर
को
आजमाना
चाहता
हूँ
बनी
हो
तुम
सुहाने
रुक्न
लेकर
तुम्हें
अब
गुनगुनाना
चाहता
हूँ
मेरे
दिल
के
न
छेड़ो
तार
दिलबर
ये
नाज़ुक
हैं
बताना
चाहता
हूँ
मुझे
आग़ोश
में
अपने
छिपा
लो
मैं
तुम
में
डूब
जाना
चाहता
हूँ
बहुत
दिन
से
सँभाला
दिल
ये
हमने
तुम्हें
इस
में
बिठाना
चाहता
हूँ
ये
दुनिया
है
सितमगर
नित्य
इस
सेे
तुम्हें
बिल्कुल
चुराना
चाहता
हूँ
Read Full
Nityanand Vajpayee
Download Image
1 Like
तुम्हें
दिल
में
बिठाना
कम
नहीं
था
ख़ुदास
रूठ
जाना
कम
नहीं
था
बदन
में
ख़ूँ
का
स्तर
घट
गया
है
मुहब्बत
को
निभाना
कम
नहीं
था
तवायफ़
की
तरह
दुनिया
के
द्वारा
मुझे
इतना
नचाना
कम
नहीं
था
जो
हँसने
खेलने
वाला
मुसाफ़िर
उसे
ग़म
में
डुबाना
कम
नहीं
था
मेरा
काँसा
ही
तुमने
तोड़
डाला
तुम्हारे
दर
पे
आना
कम
नहीं
था
जो
दिल
से
साथ
में
थी
ही
न
मेरे
उसे
अपना
बनाना
कम
नहीं
था
किसी
के
दिल
में
बसकर
'नित्य'
उस
पर
सितम
इस
तरह
ढाना
कम
नहीं
था
Read Full
Nityanand Vajpayee
Download Image
2 Likes
उनको
देखा
तो
मेरी
माँ
की
मुझे
याद
आई
वही
झुर्री
वही
आँखें
वही
मरकत
से
चरण
Nityanand Vajpayee
Send
Download Image
1 Like
निभाया
आसमाँ
ने
इश्क़
धरती
से
तो
सब
बोले
ये
अंबर
भी
ज़मीं
के
प्यार
में
बौरा
गया
था
क्या
Nityanand Vajpayee
Send
Download Image
4 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Travel Shayari
Sad Shayari
Aasman Shayari
Diversity Shayari
Motivational Shayari in Hindi