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Nityanand Vajpayee
shaayri ke is samandar men vahii pahunchege bas
shaayri ke is samandar men vahii pahunchege bas | शा'इरी के इस समुंदर में वही पहुँचेंगे बस
- Nityanand Vajpayee
शा'इरी
के
इस
समुंदर
में
वही
पहुँचेंगे
बस
आग
के
दरिया
से
जिनकी
रूह
है
झुलसी
हुई
- Nityanand Vajpayee
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हमेशा
हाथों
में
होते
हैं
फूल
उनके
लिए
किसी
को
भेज
के
मँगवाने
थोड़ी
होते
हैं
Anwar Shaoor
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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पहले
उसकी
ख़ुशबू
मैंने
ख़ुद
पर
तारी
की
फिर
मैंने
उस
फूल
से
मिलने
की
तैयारी
की
इतना
दुख
था
मुझको
तेरे
लौट
के
जाने
का
मैंने
घर
के
दरवाजों
से
भी
मुँह
मारी
की
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Tehzeeb Hafi
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सब
दुखों
का
ये
समुंदर
पार
होगा
जब,
सभी
आफ़तों
के
पत्थरों
पर
नाम
होगा
राम
का
Shoonya Shrey
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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किसी
के
होठ
समुंदर
में
भी
तरसते
रहे
किसी
की
प्यास
को
सहरा
में
मिल
गया
पानी
Ajeetendra Aazi Tamaam
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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घर
की
तक़सीम
में
अँगनाई
गँवा
बैठे
हैं
फूल
गुलशन
से
शनासाई
गँवा
बैठे
हैं
बात
आँखों
से
समझ
लेने
का
दावा
मत
कर
हम
इसी
शौक़
में
बीनाई
गँवा
बैठे
हैं
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Abrar Kashif
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ये
क्या
किया
कि
तुमने
सरेआम
कह
दिया
मेरे
किए
हुए
को
सही
काम
कह
दिया
मैंने
किए
हज़ारों
करम
इसके
बावजूद
बदनाम
बशर
ने
मुझे
बदनाम
कह
दिया
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Nityanand Vajpayee
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बहुत
जलते
हो
लेकिन
रौशनी
बिलकुल
नहीं
करते
ये
भी
जलना
है
क्या
कोई
जो
बस
नुक़सानदायक
हो
Nityanand Vajpayee
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ज़ेहन
या
दिल
कुछ
तो
तड़पाने
दो
मुझको
आप
तो
दोनों
तरफ़
राज़ी
नहीं
हैं
Nityanand Vajpayee
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दिल
को
मेरे
भला
और
क्या
चाहिए
मैं
वफ़ा
कर
रहा
हूँ
वफ़ा
चाहिए
यह
मुक़दमा
हुआ
है
पुराना
बहुत
अब
तो
इसका
मुझे
फ़ैसला
चाहिए
मैं
नहीं
आऊँगा
आपकी
सिम्त
में
अब
नहीं
आप
सा
रहनुमा
चाहिए
ज़िन्दगी
बे-वफ़ा
छोड़
देगी
मुझे
मौत
तेरा
मुझे
आसरा
चाहिए
साँप
से
दुश्मनी
हो
गई
अब
मेरी
दोस्ती
के
लिए
नेवला
चाहिए
'नित्य'
रब
भी
मिलेगा
लगाओ
लगन
भक्त
प्रह्लाद
सी
साधना
चाहिए
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Nityanand Vajpayee
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हाथ
के
छालों
को
हक़
मिलता
ज़माने
में
कहाँ
चापलूसी
ही
मलाई
मारती
है
बस
यहाँ
किस्मतों
पर
पड़
गए
ताले
हैं
मेहनतकश
के
अब
बस
चुग़ल-ख़ोरों
के
क़ाबू
में
है
ये
सारा
जहाँ
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Nityanand Vajpayee
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