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Nirvesh Navodayan
itnaa bhi meetha achha naiiñ
itnaa bhi meetha achha naiiñ | इतना भी मीठा अच्छा नईं
- Nirvesh Navodayan
इतना
भी
मीठा
अच्छा
नईं
बस
चाय
रखो
रसगुल्ला
नईं
उम्मीद
रखो
लड़के
से
बस
इश्क़
मुकम्मल
पर
खर्चा
नईं
उसके
ख़ातिर
ख़ुद
को
खो
देना
मेरी
नज़रों
में
बढ़िया
नईं
काँच
नहीं
दिल
हीरा
निकला
के
चोट
लगी,
पर
टूटा
नईं
बोसा
दे
कर
फिर
वो
लड़की
खाने
में
कहती,
जूठा
नईं
गर
करना
है
तो
इश्क़
करो
शोना
बाबू
और
बच्चा
नईं
कितना
अपना
लगता
है
वो
जब
बोले,
ओये
ज़्यादा
नईं
- Nirvesh Navodayan
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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तुम
सेे
मिल
कर
इतनी
तो
उम्मीद
हुई
है
इस
दुनिया
में
वक़्त
बिताया
जा
सकता
है
Manoj Azhar
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ये
आँसू
ढूँडता
है
तेरा
दामन
मुसाफ़िर
अपनी
मंज़िल
जानता
है
Asad Bhopali
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चिलचिलाती
धूप
है
और
पैर
में
चप्पल
नहीं
जिस्म
घाइल
है
मगर
ये
हौसला
घाइल
नहीं
Tanoj Dadhich
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जँचने
लगा
है
दर्द
मुझे
आपका
दिया
बर्बाद
करने
वाले
ने
ही
आसरा
दिया
कल
पहली
बार
लड़ने
की
हिम्मत
नहीं
हुई
मुझको
किसी
के
प्यार
ने
बुजदिल
बना
दिया
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Kushal Dauneria
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जीत
भी
लूँ
गर
लड़ाई
तुम
से
मैं
तो
क्या
मिलेगा
हाथ
में
दोनों
के
बस
इक
टूटा
सा
रिश्ता
मिलेगा
कर
के
लाखों
कोशिशें
गर
जो
बचा
भी
लूँ
मैं
रिश्ता
तो
नहीं
फिर
मन
हमारा
पहले
के
जैसा
मिलेगा
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Ankit Maurya
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मुझको
भी
ज़िद
करने
का
हक़
दो
साहब
मेरे
भीतर
भी
इक
बच्चा
रहता
है
Atul K Rai
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यार
आसान
होती
नहीं
यह
कला
मौन
रहना
बड़ी
ही
चुनौती
रही
Aniket sagar
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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उस
हिज्र
पे
तोहमत
कि
जिसे
वस्ल
की
ज़िद
हो
उस
दर्द
पे
ला'नत
की
जो
अशआ'र
में
आ
जाए
Vipul Kumar
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प्यार
कभी
भी
हो
सकता
है
लोगों
को
उम्र
नहीं
होती
है
पागल
होने
की
Nirvesh Navodayan
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इतने
दिन
में
इतना
तो
जान
गया
हूँ
उस
लड़की
को
झुमके
अच्छे
लगते
हैं
Nirvesh Navodayan
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बीच
सफ़र
में
यूँँ
रुकना
बतलाता
है
बिन
मतलब
के
साथ
नहीं
चलता
कोई
सानी
कैसे
मिल
जाएगा
फिर
तुम
को
मेरा
तो
हमनाम
नहीं
मिलता
कोई
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Nirvesh Navodayan
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हर
जानिब
हो
कर
आया
हूँ
बातें
हैं
बस
यार
वही
चर्चा
उसके
चहरे
का
या
चहरे
का
श्रंगार
वही
अच्छा
सब
लगता
है
पर
दो
चीजों
का
कायल
हूँ
मैं
खन
खन
तेरे
कंगन
की
औ
पायल
की
झंकार
वही
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Nirvesh Navodayan
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वैसे
तो
हम
यार
भुला
भी
देते
पर
ज़ख़्म
दिए
हैं
उसने
मेरे
सीने
पर
इतने
दिन
तक
साथ
रहे
हैं
हम
दोनों
आदत
सब
जाएँगी
उसके
बच्चे
पर
अब
तुम
बतलाओगे
उसके
बारे
में
देखो
इक
तिल
और
है
उसके
कंधे
पर
जिस
घर
में
बस
माँ
हो
,
मैंने
देखा
है
फिर
ज़िम्मेदारी
होती
है
बेटे
पर
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Nirvesh Navodayan
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