मिरे   क़िस्से   में    कोई   ग़म  नहीं  मिलता

  - Nilesh Barai
मिरेक़िस्सेमेंकोईग़मनहींमिलता
मिरामतलबमुझेहम-दमनहींमिलता।
सवालोंमेंजवाबोंमेंख़यालोंमें
तुझेढूंढ़ाहैतूबाहमनहींमिलता।
नयाइकरोगआयाहैबजारोंमें
जिसेलगताउसेमरहमनहींमिलता।
निगाह--नाज़सेमारागयाहूँमैं
अगरबचतातोमुस्तहकमनहींमिलता।
पिलायाहोतागरआँखोंकापानीतो,
यहाँमैंआजतिश्ना-दमनहींमिलता।
शनासामैक़देतकलेकेचलमुझको
मुझेजोचाहिएआलमनहींमिलता।
तिरामिलनामिलनाऔरमुद्दाहै
तिरासानीहीकम-अज़-कमनहींमिलता।
कभीजोफूलबरसाताथाइकपौधा
उसेफूलोंकाइकमौसमनहींमिलता।
  - Nilesh Barai
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