zehan ko kabze men kar uljhan na choome | ज़ेहन को कब्ज़े में कर उलझन न चू

  - Neeraj Neer
ज़ेहनकोकब्ज़ेमेंकरउलझनचू
में
इश्क़यानीतिफ़्लसादामनचू
में
वस्लकामतलबनहींबसचूमनाहै
आगसेकहदोअभीईंधनचू
में
जिस्मवालोंकोहिदायतहैमगरफिर
भूलकरभीवोमिरायेमनचू
में
सोचताहूँक्याकरेगीहिज्रमेंवो
यादआनेपरकहींदर्पनचू
में
ठीकहैमैंफेरलेताहूँनज़रको
तुमभीझुमकेसेकहोगर्दनचू
में
होसकेतोजानरोकोघुंघरूको
रक़्सकरतेपाँवकीछन-छनचू
में
मैंतोउसकानामलिखकरचूमताहूँ
बाँवलीवोहाथकेकंगनचू
में
चूमनेकीरस्मबाकीहैअभीभी
डरहैपहलेदेहकोउबटनचू
में
दिलनिशानेपररखाइसबारउसने
कैसेकहदूँतीरकोधड़कनचू
में
'नीर'ख़्वाहिशहैमिरीज़िंदालगूँमैं
मारेवहशतकेफ़कतबसतनचू
में
  - Neeraj Neer
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy