ajee yakeen maaniye tha pahle par aaj kuchh bhi nahin kahii bhi | अजी यक़ीं मानिए था पहले पर आज कुछ भी नहीं, कहीं भी

  - Neeraj Neer
अजीयक़ींमानिएथापहलेपरआजकुछभीनहीं,कहींभी
किइसजहाँमेंतिरीकमीकाइलाजकुछभीनहीं,कहींभी
सितमकिदुखमेरालिखनेसेभीगयानहींसोमैंचीखताहूँ
हरीभरीफ़स्लहैइसमेंअनाजकुछभीनहीं,कहींभी
मलालहैमैंनेउसकोयेहक़दियाथादिलतोड़े,दिलदुखाए
बिछड़नेवालोंबिछड़नेकाअबरिवाजकुछभीनहीं,कहींभी
अगरवोकहतीतुम्हारीहूँमैं,मैंजंगदुनियासेजीतजाता
सुनाहैदोलोगपासहोजबसमाजकुछभीनहीं,कहींभी
उजालेआँखोंकेख़त्मयानी,हैतीरगीकेगिरफ़्तमेंहम
पर'कौनसमझेअगरनहींतूसिराजकुछभीनहीं,कहींभी
कमालदेखेंकिधड़कनोंकोपताहैबसएकनामतेरा
'नीर'क्यासचमेंदूजाऔर'कोईसाज़कुछभीनहीं,कहींभी
  - Neeraj Neer
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