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Naviii dar b dar
ye bas do lafzon ka hai qissa hamaara
ye bas do lafzon ka hai qissa hamaara | ये बस दो लफ़्ज़ों का है क़िस्सा हमारा
- Naviii dar b dar
ये
बस
दो
लफ़्ज़ों
का
है
क़िस्सा
हमारा
मोहब्बत
माँगे
है
ये
हिस्सा
हमारा
कोई
उल्फ़त
में
ठोकर
खाकर
तो
देखे
बहुत
महँगा
लगा
अब
रिश्ता
हमारा
- Naviii dar b dar
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ज़िंदगी
तुझ
से
हर
इक
साँस
पे
समझौता
करूँँ
शौक़
जीने
का
है
मुझ
को
मगर
इतना
भी
नहीं
Muzaffar Warsi
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मैं
शाइर
उसको
चूड़ी
ही
दे
सकता
था
बस
रिश्ता
सोने
के
कंगन
देने
पर
होता
है
Neeraj Neer
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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तुम्हारा
प्यार
तो
साँसों
में
साँस
लेता
है
जो
होता
नश्शा
तो
इक
दिन
उतर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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इक
लफ़्ज़-ए-मोहब्बत
का
अदना
ये
फ़साना
है
सिमटे
तो
दिल-ए-आशिक़
फैले
तो
ज़माना
है
Jigar Moradabadi
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ले
साँस
भी
आहिस्ता
कि
नाज़ुक
है
बहुत
काम
आफ़ाक़
की
इस
कारगह-ए-शीशागरी
का
Meer Taqi Meer
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ज़िस्त
की
जान
जाते
भी
देखा
हूँ
मैं
मौत
को
साँस
आते
भी
देखा
हूँ
मैं
सब
तो
हँसते
ही
हैं
मेरे
हालात
पे
दर्द
को
मुस्कुराते
भी
देखा
हूँ
मैं
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SHIV SAFAR
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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ये
मोहब्बत
का
फ़साना
भी
बदल
जाएगा
वक़्त
के
साथ
ज़माना
भी
बदल
जाएगा
Waseem Barelvi
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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फ़ितरत
भला
बदली
है
यूँँ
आदमी
की
कब
जो
अब
लोग
उड़ाते
है
क्यूँँ
हर
किसी
की
खिल्ली
Naviii dar b dar
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दिल
की
वो
जब
यूँँ
बग़ावत
भी
न
समझे
वो
तो
क्यूँ
झूठी
कहावत
भी
न
समझे
हम
तो
देते
ही
रहे
यूँँ
मुस्कुराहट
हम
ज़माने
की
अदावत
भी
न
समझे
2122
2122
2122
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Naviii dar b dar
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ख़्वाबों
की
बस
एक
नादानी
के
सिवा
क्या
मिला
मुझको
परेशानी
के
सिवा
ठोकरें
खाते
रहे
राहों
में
यूँँ
ही
कुछ
भी
तो
है
क्या
पशेमानी
के
सिवा
क्यूँ
वो
आँखों
में
भी
छाया
है
इस
क़दर
वो
नहीं
है
क्यूँ
निगहबानी
के
सिवा
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Naviii dar b dar
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फॅंसाकर
के
मुझको
हमेशा
तो
ख़ुश
रहती
है
वो
परेशानी
भी
दोस्ती
अच्छे
से
है
निभाती
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झूठे
वचन
कितने
निभाए
जाएँगे
आकर
वो
ख़्वाबों
में
सताए
जाएँगे
होगा
ज़मीं
से
जब
कभी
भी
सामना
दिन
में
भी
तारे
यूँँ
दिखाए
जाएँगे
मुफ़्लिस
यहाँ
भी
डूबकर
चुपचाप
है
यूँँ
राज़
दुनिया
से
छुपाए
जाएँगे
कर
के
वो
दावे
जब
तुम्हें
ललचाएँ
तो
मुफ़लिस
यहाँ
अक्सर
लुभाए
जाएँगे
2212
2212
2212
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Naviii dar b dar
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