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Naviii dar b dar
kisi ke vaaste khud ko sanwaar kar dekho
kisi ke vaaste khud ko sanwaar kar dekho | किसी के वास्ते ख़ुद को सँवार कर देखो
- Naviii dar b dar
किसी
के
वास्ते
ख़ुद
को
सँवार
कर
देखो
तुम
अपने
आप
को
बदला
हुआ
ही
पाओगे
- Naviii dar b dar
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दिलों
पे
हुए
जो
सितम
कैसे
कैसे
बहकते
गए
हैं
क़दम
कैसे
कैसे
मुहब्बत
के
मारो
से
तुम
ये
न
पूछो
गुज़ारा
है
हर
दिन
सनम
कैसे
कैसे
ये
दुनिया
है
ज़ालिम
सताती
रहेगी
यूँँ
पालो
न
दिल
में
भी
ग़म
कैसे
कैसे
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Naviii dar b dar
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किस
सफ़र
को
यूँँ
भला
तन्हा
ही
समझें
दोस्तों
हर
सफ़र
में
उसकी
यादें
साथ
चलती
हैं
मेरे
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कभी
राह
अपनी
मुयस्सर
भी
होगी
गरीबी
जो
हमको
सताए
हुए
है
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यूँँ
तो
ज़माने
में
अच्छी
भी
तर्बियत
रखते
हैं
कुछ
रौशन
हो
के
भी
अंधेरे
की
अहमियत
रखते
हैं
कुछ
हैं
जानते
क़द्र
इंसा
की
दिल
से
होती
यहाँ
पर
बस
इसलिए
अब
भी
दिल
में
इंसानियत
रखते
हैं
कुछ
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Naviii dar b dar
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उम्मीद
को
इम्कान
माना
जाएगा
यूँँ
दर्द
को
मेहरान
माना
जाएगा
जब
राह
मंज़िल
की
बहुत
हो
दूर
तो
उस
राह
को
अंजान
माना
जाएगा
ठोकर
को
सीने
से
लगाए
बैठा
हो
तब
हार
को
आसान
माना
जाएगा
इस
इश्क़
में
मुझको
मिला
है
क्या
से
क्या
क्या
प्यार
को
नुक़सान
माना
जाएगा
सैलाब
है
सीने
में
यूँँ
रक्खा
हुआ
ख़ामोशी
को
तूफ़ान
माना
जाएगा
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