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Naviii dar b dar
apna to vo mujhko kahtaa raha
apna to vo mujhko kahtaa raha | अपना तो वो मुझको कहता रहा
- Naviii dar b dar
अपना
तो
वो
मुझको
कहता
रहा
दिल
में
किसी
और
के
रहता
रहा
मुझको
मिला
दर्द
है
रातों
में
जिस्म
मेरा
दर्द
सहता
रहा
- Naviii dar b dar
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अभी
दिल
के
हर
साज़
बदले
हुए
हैं
मुहब्बत
के
आग़ाज़
बदले
हुए
हैं
यहाँ
दोस्ती
भी
समझकर
ही
करना
ज़माने
के
अंदाज़
बदले
हुए
हैं
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इक
मुहब्बत
की
वो
दुनिया
जो
बनाई
थी
कभी
अपनी
अपनी
ज़िंदगी
में
भूल
बैठे
हम
सभी
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हुनर
का
काम
सीखा
भी
नहीं
आया
लुभाने
का
तरीक़ा
भी
नहीं
आया
ज़माने
भर
से
तो
की
दिल-लगी
हमने
मोहब्बत
का
सलीक़ा
भी
नहीं
आया
1222
1222
1222
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किसकी
आँखों
में
समाए
रहते
हो
इश्क़
की
दुनिया
बसाए
रहते
हो
इक
नज़र
यूँँ
मुस्कुरा
के
देखो
भी
दिल
को
तुम
मेरे
जलाए
रहते
हो
प्यार
हम
सेे
तो
कहाँ
करते
हो
तुम
सारी
दुनिया
को
रिझाए
रहते
हो
आँखों
ही
आँखों
में
कहके
बात
को
हमको
बस
यूँँ
ही
सताए
रहते
हो
दिल
को
भी
यूँँ
हम
तसल्ली
कैसे
दें
आँखों
में
ऐसे
ही
छाए
रहते
हो
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Naviii dar b dar
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एक
इश्क़
का
भी
यूँँ
सवाब
होगा
तब
हमारे
हिस्से
भी
जवाब
होगा
नज़रें
भी
ये
आख़िर
तो
चुनेगी
किसको
ये
भी
देखना
तो
लाजवाब
होगा
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