hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Naviii dar b dar
kabhi muflisi ke sataaye hue
kabhi muflisi ke sataaye hue | कभी मुफ़्लिसी के सताए हुए
- Naviii dar b dar
कभी
मुफ़्लिसी
के
सताए
हुए
निगाहों
से
अक्सर
गिराए
हुए
कभी
प्यार
को
लोग
जाने
कहाँ
मिले
जो
कभी
थे
पराए
हुए
मेरी
बात
को
लाज़िमी
कर
गए
मुहब्बत
को
जो
आज़माए
हुए
दिलों
में
उसी
के
रहा
ही
नहीं
मेरा
आशियाँ
थे
बनाए
हुए
अगर
हाथ
मेरा
जो
वो
थाम
ले
रखे
हैं
सितारे
बिछाए
हुए
मेरी
भी
तमन्ना
को
देखा
नहीं
वो
बैठे
थे
जो
मुस्कुराए
हुए
यक़ीं
है
कि
वो
आएगा
फिर
कभी
'नवी'
जिसके
सपने
सजाए
हुए
122
122
122
12
- Naviii dar b dar
Download Ghazal Image
है
बा-ख़बर
सी
भी
अपनी
कहानी
प्यारी
बातों
की
सभी
दिलों
में
बस
जाती
है
चाय
उसके
हाथों
की
Naviii dar b dar
Send
Download Image
0 Likes
मेरे
ग़म
का
जो
सबब
ढूॅंढ़ते
हो
करके
तन्हा
मुझे
अब
ढूॅंढ़ते
हो
Naviii dar b dar
Send
Download Image
1 Like
देश
को
अब
झोंक
नफ़रत
में
ख़ुश
हैं
वो
कम
से
कम
कुर्सी
रहेगी
कुछ
साल
तो
Naviii dar b dar
Send
Download Image
0 Likes
विचारों
के
मंथन
से
निकली
ग़ज़ल
कई
साथ
छोड़े
है
पिछली
ग़ज़ल
किसी
को
सँभलने
का
मौक़ा
नहीं
यही
कहती
है
मेरी
अगली
ग़ज़ल
ज़बाँ
को
भी
रक्खा
हिसाबों
से
बस
चुभेगी
दिलों
में
ये
अहली
ग़ज़ल
इन
आँखों
में
जो
दर्द
देखे
यहाँ
सही
मायने
में
है
असली
ग़ज़ल
कई
मर्तबा
लफ़्ज़
चुभने
लगे
अधूरी
रही
बस
अधूरी
ग़ज़ल
Read Full
Naviii dar b dar
Download Image
1 Like
कुछ
भी
तो
अब
नहीं
चाहता
हूँ
ज़िंदगी
यूँँ
हसीं
चाहता
हूँ
मेरे
हिस्से
रहें
ग़म
ये
सारे
उसको
देना
यक़ीं
चाहता
हूँ
Read Full
Naviii dar b dar
Send
Download Image
0 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Travel Shayari
Beti Shayari
Breakup Shayari
Intiqam Shayari
Tasawwur Shayari