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Naviii dar b dar
ik vo aisa bhi hamsafar mila nahin
ik vo aisa bhi hamsafar mila nahin | इक वो ऐसा भी हम-सफ़र मिला नहीं
- Naviii dar b dar
इक
वो
ऐसा
भी
हम-सफ़र
मिला
नहीं
दिल
में
रहने
का
तो
हुनर
मिला
नहीं
ग़म
ही
तो
था
जो
भी
मिला
मुझे
यहाँ
चाहा
जो
भी
था
चाहकर
मिला
नहीं
ढूँढता
ही
रहा
वो
शख़्स
आज
भी
मुझ
सा
भी
कोई
इस
क़दर
मिला
नहीं
सब
यहाँ
रहते
हैं
हर
एक
दिल
में
ही
दुख
तो
ये
है
मुझे
बसर
मिला
नहीं
राहें
अब
तो
नवी
यूँँ
तन्हा
कट
चुकी
उसके
दिल
का
मुझे
तो
घर
मिला
नहीं
- Naviii dar b dar
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हर
शख़्स
की
नीयत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
मैं
बात
की
औसत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
है
आदमी
क्यूँ
आदमी
का
अब
यहाँ
दुश्मन
उस
खोई
'अक़ीदत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
जो
हो
रहा
है
मुल्क
में
ये
नफ़रतों
का
दौर
मैं
दिल
से
भी
अज़्मत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
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Naviii dar b dar
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वो
मेरा
ही
बना
अपना
भी
जिस
तरह
यारों
हवाओं
को
भी
तो
इसकी
ख़बर
नहीं
थी
यूँँ
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अब
तो
शायद
ही
कभी
यूँँ
भूल
पाएँ
हम
ताज़ा
है
अब
भी
वो
तेरे
शहर
की
यादें
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तो
इस
नफ़रत
ने
सब
को
बाँट
के
रख
ही
दिया
लहू
का
क़तरा
भी
अब
तेरा
मेरा
हो
चला
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इक
हसीं
ख़्वाब
को
मिल
गया
आसरा
फिर
किसी
और
दुनिया
में
रहना
नहीं
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