ho poorab kii ya pashchimi raushni | हो पूरब की या पश्चिमी रौशनी

  - Naveen c Chaudhary
होपूरबकीयापश्चिमीरौशनी
अँधेरोंसेलड़तीरहीरौशनी
क़तारोंसेक़तरेउलझतेरहे
ज़मानोंकोमिलतीरहीरौशनी
इबादतकीकिश्तेंचुकातेरहो
किरायेपेहैरूहकीरौशनी
किसीनूरकीछूटहैहरचमक
ज़मींपरभलाकबउगीरौशनी
अँधेरोंपेदुनियाकादिलगया
फ़नाहोगईबावलीरौशनी
सितारोंपेजाकरकरोगेभीक्या
जोहासिलनहींपासकीरौशनी
उजालोंमेंभीसूझताकुछनहीं
तूरुख़सतहुआ,छिनगईरौशनी
गमकती-चमकतीरहीराहभर
परीथीवोयासंदलीरौशनी
वोघर,घरनहीं;वोतोहैकहकशाँ
जहाँतनधरेलाड़लीरौशनी
बहुतजारहेहोवहाँआजकल
तोक्यातुमपेभीमरमिटीरौशनी
येचर्चाबहुतचाँद-तारोंमेंहै
मुनव्वरकोकिससेमिलीरौशनी
  - Naveen c Chaudhary
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