andhi raat ke aate hi | अंधी रात के आते ही

  - Nahid Qasmi
अंधीरातकेआतेही
सबचुप-चापसेइकगोशेमेंसिमटगए
परमैंनेअपनीकुटियाकीतारीकीसेजंगकीठानी
ख़ुदकोइकमटकीकेदिएमेंढालदिया
तबछोटेसेआँगनमेंनन्ही-मुन्नीमस़्कातीकिरनोंनेझूमरडाला
सबकेरौशनरौशनचेहरेहँसनेलगे
लेकिनसुब्हकेजागतेही
मिरीथकीथकीसीनन्ही-मुन्नीकिरनोंकोठोकरसेउड़ाते
दूरतकफैलेहुएखेतमेंशबनमकेक़ुमक़ु
मेंमिटाते
रौशनीकेअम्बारोंमेंसेरस्ताबनाते
जगमगजगमगसूरजकेऐवाँकीजानिबबढ़नेवालो!
मेरेअपनो
मुझकोकुटियाकेएकताक़मेंरखकरभूलगएहो?
  - Nahid Qasmi
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