azaab-e-hijr se anjaan thodii hota hai | अज़ाब-ए-हिज्र से अंजान थोड़ी होता है

  - Naheed Virk
अज़ाब-ए-हिज्रसेअंजानथोड़ीहोताहै
येदिलअबइतनाभीनादानथोड़ीहोताहै
येज़िंदगीहैबहुतकुछयहाँपेमुमकिनहै
किकुछहोनेकाइम्कानथोड़ीहोताहै
येदिलकेज़ख़्मछुपाकरजोमुस्कुरातेहैं
तोमेरेदोस्तयेआसानथोड़ीहोताहै
कभी-कभारतोबिदअतभीहोहीजातीहै
हरएकलम्हातिराध्यानथोड़ीहोताहै
वोजिसकेपासमोहब्बतभीहो,वफ़ाभीहो
भलावोबे-सर-ओ-सामानथोड़ीहोताहै
तिरीवफ़ामेंकमीकुछतोआईहैकियेदिल
बिला-जवाज़परेशानथोड़ीहोताहै
इधरउधरसेदलीलेंउठानीपड़जाएँ
जोइतनाकच्चाहो,ईमानथोड़ीहोताहै
  - Naheed Virk
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