yuñ nahin tha ki teergii kam thii | यूँँ नहीं था कि तीरगी कम थी

  - Nafas Ambalvi
यूँँनहींथाकितीरगीकमथी
धूपसेअपनीदोस्तीकमथी
ख़्वाहिशोंकेहुजूमथेलेकिन
अपनेहिस्सेमेंज़िंदगीकमथी
तुमआएतोबसहुआइतना
कलचराग़ोंमेंरौशनीकमथी
हाँवोहँसकरनहींमिलाफिरभी
उसकीबातोंमेंबे-रुख़ीकमथी
ग़मउसेभीथाबिछड़नेका
मेरीआँखोंमेंभीनमीकमथी
कुछतग़ाफ़ुल-मिज़ाजथासाक़ी
औरकुछअपनीप्यासभीकमथी
उसकालहजातोख़ूबथालेकिन
उसकेशे'रोंमेंशाइ'रीकमथी
क्यूँँमुझेदेगयावोसन्नाटे
क्यामिरेघरमेंख़ामुशीकमथी
  - Nafas Ambalvi
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