hazaar gham hon to phir intikhaab kaise karoon | हज़ार ग़म हों तो फिर इंतिख़ाब कैसे करूँँ

  - Naeem Saba
हज़ारग़महोंतोफिरइंतिख़ाबकैसेकरूँँ
दरीदादिलकोमैंनज़्र-ए-अज़ाबकैसेकरूँँ
मैंउसकोभूलचुकाथाकईबरसकेबाद
मिलीहैवस्लकीसाअ'तहिसाबकैसेकरूँँ
वहीहैइश्क़कीमंज़िलवहीवफ़ाकासफ़र
खुलीजोआँखज़राज़िक्र-ए-ख़्वाबकैसेकरूँँ
ग़म-ए-हयातकीअबकोईइंतिहाहीनहीं
मैंअपनीज़ातकोवक़्फ़-ए-सराबकैसेकरूँँ
येशहर-ए-दर्दहैदोस्तान-ए-दिल-ज़दगाँ
वफ़ाशुमारकरूँँएहतिसाबकैसेकरूँँ
वहीहैअज़्मतजाहहशमवहीमंसब
फ़क़ीह-ए-शहरवहीहैख़िताबकैसेकरूँँ
'सबा'वोशख़्सअभीतकहैमुझसेबेगाना
मैंउसकीज़ातसेफिरइंतिसाबकैसेकरूँँ
  - Naeem Saba
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