raah jis ne chali ghaafiloon ki tarah | राह जिस ने चली ग़ाफ़िलों की तरह

  - Nadim Balkhi
राहजिसनेचलीग़ाफ़िलोंकीतरह
क़त्लभीवोहुआबुज़दिलोंकीतरह
तेरीयादेंतसव्वुरकोजबमिलगईं
मेरीख़ल्वतसजीमहफ़िलोंकीतरह
ढूँडतेहैंसराबोंमेंक्यातिश्ना-लब
दश्तहोतानहींसाहिलोंकीतरह
मोमबनकरवोहरगिज़पिघलतेनहीं
सख़्तियोंमेंजोदिलहैंसिलोंकीतरह
रोग़नइख़्लासकारंगलानेलगा
मैंनिचोड़ागयाजबतिलोंकीतरह
येहैसचतेरीफ़ुर्क़तनेमोहलतदी
शबगुज़ारीमगरवासिलोंकीतरह
सरमेंसौदा-ए-सरहोअगरजान-ए-मन
मुश्किलेंभीनहींमुश्किलोंकीतरह
कुछजवाबअहल-ए-दिलकेसवालोंकादें
बातकरतेहैंजोआक़िलोंकीतरह
क़ुर्बतउनकीफ़रेब-ए-सफ़रदेगई
दूरसेजोलगेंमंज़िलोंकीतरह
इकमुक़द्दससहीफ़ामिरीशा'इरी
जिसकोपढ़तेहोतुमनाविलोंकीतरह
मेरेअफ़्कार'नादिम'तन-आसाँनहीं
यूँँतोलगताहूँमैंकाहिलोंकीतरह
  - Nadim Balkhi
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