ek sukhun ko bhool kar ek kalaam tha zaroor | एक सुख़न को भूल कर एक कलाम था ज़रूर

  - Nadeem Bhabha
एकसुख़नकोभूलकरएककलामथाज़रूर
मेरातोज़िक्रहीथापरतिरानामथाज़रूर
काँपरहेथेमेरेहाथचीख़रहेथेबाम-ओ-दर
ज़हरअगरनहींथावोआख़िरीजामथाज़रूर
यूँँहीनहींतमामउम्रसज्देमेंहीगुज़रगईइश्क़कीइसनमाज़काकोईइमामथाज़रूर
यादअभीनहींहमेंज़ेहनपेज़ोरदेचुके
तुमहीसेमिलनेआएथेतुमसेहीकामथाज़रूर
तुमनेजबउसकीबातकीतुमपेभीप्यारगया
चूमानहींतुम्हेंमियाँगरचेमक़ामथाज़रूर
आपमुझेभुलाचुकेयादतोकीजिएजनाब
मेरीभीइकशनाख़्तथीमेराभीनामथाज़रूर
  - Nadeem Bhabha
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