ek to kaavish-e-jigar bhi karoon | एक तो काविश-ए-जिगर भी करूँँ

  - Nadeem ahmad
एकतोकाविश-ए-जिगरभीकरूँँ
औरफिरमिन्नत-ए-समरभीकरूँँ
इश्क़मेंख़ैरथाजुनूँलाज़िम
अबकोईदूसराहुनरभीकरूँँ
सोचताहूँतिरेतआक़ुबमें
ख़ुदकोरुस्वा-ए-बाल-ओ-परभीकरूँँ
पहलेबिन-माँगेज़िंदगीदेदी
औरफिरशर्तहैबसरभीकरूँँ
शे'रलिक्खूँभीऔरलोगोंमें
शा'इरीअपनीमुश्तहरभीकरूँँ
लफ़्ज़मअ'नीकाजब्रझेलूँभी
औरफिरख़ुदकोमो'तबरभीकरूँँ
कामकुछबे-सबबभीकरडालूँ
औरकुछकामसोचकरभीकरूँँ
  - Nadeem ahmad
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