abhii apne martaba-e-husn se miyaan ba-khabar tu hua nahin | अभी अपने मर्तबा-ए-हुस्न से मियाँ बा-ख़बर तू हुआ नहीं

  - Mushafi Ghulam Hamdani
अभीअपनेमर्तबा-ए-हुस्नसेमियाँबा-ख़बरतूहुआनहीं
किग़ज़ल-सरातिरेबाग़मेंकोईमुर्ग़-ए-ताज़ा-नवानहीं
जोगलीमेंयारकीजाऊँहूँतोअजलकहेहैयेरहमखा
तूसितम-रसीदाजाउधरकोईज़िंदावाँसेफिरानहीं
वोग़रीब-ओ-बे-कस-ओ-ज़ारथातुझेउसकादेताहूँमैंपता
तिरेकुश्ताकावोमज़ारथाकिचराग़जिसमेंजलानहीं
जोहकीमपासमैंजाऊँहूँतोवोदोस्तीसेसुनाएहै
तूमआशकीभीतलाशकरयेमक़ाम-ए-फ़क़्र-ओ-फ़नानहीं
मुझेइश्क़रखताहैसर-निगूँमिराजालपूछोक्याकहूँ
मैंहबाब-ए-बहरकाशीशाहूँमिरेटूटनेकीसदानहीं
तिरेख़ाकसारोंनेअपनासरनहींपीटादश्तमेंइसक़दर
किबगूलावाँसेग़ुबारकातरफ़आसमाँकेगयानहीं
नसीम-ए-बाग़-ओ-बहारहूँफ़िदा-ए-रू-ए-निगारहूँ
मैंग़रीब-ए-शहर-ओ-दयारहूँमिरीदैरकाबामेंजानहीं
तिरेनख़्ल-ए-हुस्नकीकोंपलेंअभीना-शगुफ़्ताहैंपरी
जोनसीमआईहैउसनेभीइन्हेंकुछसमझकेछुआनहीं
तिरेगेसुओंमेंजोजातीहैतोमिराहीहालकहआतीहै
मिरीख़स्म-ए-जाँभीतोइसक़दरयेनसीम-ए-नाफ़ा-कुशानहीं
मैंरहनेवालाहूँबाग़कासफ़ीर-संजहूँरागका
मुझेढूँडेहैसोवोकिसजगहकहींआशियान-ए-हुमानहीं
कोईज़ख़्म-ख़ुर्दाहैख़ारकाकोईख़ूँ-तपीदाबहारका
हैमिराहीहौसला'मुसहफ़ी'किकिसीसेमुझकोगिलानहीं
  - Mushafi Ghulam Hamdani
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