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Murari Mandal
maut par rone ka mere vo dikhaava kar rahe hain
maut par rone ka mere vo dikhaava kar rahe hain | मौत पर रोने का मेरे, वो दिखावा कर रहे हैं
- Murari Mandal
मौत
पर
रोने
का
मेरे,
वो
दिखावा
कर
रहे
हैं
ख़त्म
इक
होता
नहीं,
दूजा
छलावा
कर
रहे
हैं
- Murari Mandal
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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चलता
रहने
दो
मियाँ
सिलसिला
दिलदारी
का
आशिक़ी
दीन
नहीं
है
कि
मुकम्मल
हो
जाए
Abbas Tabish
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कुछ
इस
तरह
से
गुज़ारी
है
ज़िन्दगी
जैसे
तमाम
उम्र
किसी
दूसरे
के
घर
में
रहा
Ahmad Faraz
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ये
इश्क़-विश्क़
का
क़िस्सा
तमाम
हो
जाए
सफ़ेद
दाढ़ी
हवस
की
गुलाम
हो
जाए
जवान
लड़कियों
बूढ़ों
से
तुम
रहो
हुश्यार
न
जाने
कौन
कहाँ
आसाराम
हो
जाए
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Paplu Lucknawi
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शरीफ़
इंसान
आख़िर
क्यूँ
इलेक्शन
हार
जाता
है
किताबों
में
तो
ये
लिक्खा
था
रावन
हार
जाता
है
Munawwar Rana
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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इश्क़
तिरी
इंतिहा
इश्क़
मिरी
इंतिहा
तू
भी
अभी
ना-तमाम
मैं
भी
अभी
ना-तमाम
Allama Iqbal
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सब
ख़्वाहिशें
पूरी
हों
'फ़राज़'
ऐसा
नहीं
है
जैसे
कई
अश'आर
मुकम्मल
नहीं
होते
Ahmad Faraz
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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अजीब
दर्द
का
रिश्ता
था
सब
के
सब
रोए
शजर
गिरा
तो
परिंदे
तमाम
शब
रोए
Tariq Naeem
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नशा
मय
का
बहुत
छोटा
लगा
है
कि
जबसे
हुस्न
का
चस्का
लगा
है
अधर
को
फ्रूट
के
जैसे
चखूँगा
इक
अरसे
बाद
ये
मौक़ा
लगा
है
ख़फ़ा
क्यूँ
है
हमीं
से
शाहज़ादी
बुरा
किस
बात
का
इतना
लगा
है
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Murari Mandal
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अभी
तो
फ़र्क़
भी
पड़ता
नहीं
कोई
बिछड़
कर
लोग
मरते
थे
बहुत
पहले
Murari Mandal
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पूछता
हूँ
मैं
जो
उस
सेे
प्यार
कर
लें
क्या
ज़रा
कह
नहीं
पाती
है
कुछ
भी
वो
नहीं
को
छोड़
कर
Murari Mandal
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तुम्हारी
ही
तरह
सीधी
हो
सच्ची
हो
हमारे
घर
में
बेटी
हो
तो
तुम
सी
हो
अलावा
और
इसके
क्या
कहूंगा
मैं
तुम्हारे
हम
सेफ़र
की
उम्र
लंबी
हो
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Murari Mandal
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मौला
उस
एक
शख़्स
से
मिलती
मुझे
ख़ुशी
बाक़ी
जहान
रख
ले
तू
मुझको
गिला
नहीं
Murari Mandal
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