hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Puneet Mishra Akshat
ek baras ab poora hone vaala hai
ek baras ab poora hone vaala hai | एक बरस अब पूरा होने वाला है
- Puneet Mishra Akshat
एक
बरस
अब
पूरा
होने
वाला
है
पिछले
साल
इसी
मौसम
में
बिछड़े
थे
- Puneet Mishra Akshat
Download Sher Image
तुम्हारे
पाँव
क़सम
से
बहुत
ही
प्यारे
हैं
ख़ुदा
करे
मेरे
बच्चों
की
इन
में
जन्नत
हो
Rafi Raza
Send
Download Image
106 Likes
अगर
जन्नत
मिला
करती
फ़क़त
सज्दों
के
बदले
में
तो
फिर
इबलीस
मुर्शिद
सब
सेे
पहले
जन्नती
होता
Shajar Abbas
Send
Download Image
3 Likes
दरिया
के
किनारे
पे
मिरी
लाश
पड़ी
थी
और
पानी
की
तह
में
वो
मुझे
ढूँड
रहा
था
Adil Mansuri
Send
Download Image
22 Likes
शदीद
प्यास
थी
फिर
भी
छुआ
न
पानी
को
मैं
देखता
रहा
दरिया
तिरी
रवानी
को
Shahryar
Send
Download Image
25 Likes
लब-ए-दरिया
पे
देख
आ
कर
तमाशा
आज
होली
का
भँवर
काले
के
दफ़
बाजे
है
मौज
ऐ
यार
पानी
में
Shah Naseer
Send
Download Image
28 Likes
एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
Send
Download Image
33 Likes
मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
Read Full
Shajar Abbas
Send
Download Image
4 Likes
इक
और
दरिया
का
सामना
था
'मुनीर'
मुझ
को
मैं
एक
दरिया
के
पार
उतरा
तो
मैंने
देखा
Muneer Niyazi
Send
Download Image
26 Likes
आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
Send
Download Image
32 Likes
धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
Send
Download Image
32 Likes
Read More
कितने
दर्द
सहेजे
हमने,तब
जाकर
ये
गीत
लिखे
हैं
तुम
क्या
जानों
इन
नयनों
की
कितनी
पीर
पुरानी
होगी
Puneet Mishra Akshat
Send
Download Image
6 Likes
ज़ख़्म
हम
दिल
के
दिखाएँ
तो
दिखाएँ
कैसे
हो
गई
है
जो
ख़ता
उस
को
छिपाएँ
कैसे
मुफ़लिसी
देख
मेरी
जिसने
भुलाया
मुझको
ऐसे
इन्साँ
को
वफा़दार
बताएँ
कैसे
Read Full
Puneet Mishra Akshat
Send
Download Image
3 Likes
यहाँ
अब
कौन
करता
है
ज़माने
में
वफ़ा
उल्फ़त
यहाँ
उल्फ़त
के
आड़े
जिस्म
के
व्यापार
होते
हैं
मुझे
बीता
हुआ
अपना
ज़माना
याद
आता
है
कहाँ
फिर
से
वो
बचपन
के
भला
इतवार
होते
हैं
Read Full
Puneet Mishra Akshat
Send
Download Image
6 Likes
जिसको
समझा
था
रौशनी-ए-क़मर
शख़्स
ऐसा
वो
आबगीना
था
उस
सेे
बिछड़े
थे
सर्द
मौसम
में
साल
का
पहला
ही
महीना
था
Read Full
Puneet Mishra Akshat
Send
Download Image
1 Like
हर
दिए
को
मुयस्सर
नहीं
रौशनी
रात
भर
एक
जुगनू
जला
रह
गया
मैंने
रस्में-निशानी
में
दिल
दे
दिया
और
वो
था
के
बस
बे-वफ़ा
रह
गया
Read Full
Puneet Mishra Akshat
Send
Download Image
8 Likes
Read More
Bahadur Shah Zafar
Vishal Bagh
Sarvat Husain
Shahzad Ahmad
Hafeez Banarasi
Unknown
Krishna Bihari Noor
Khalid Nadeem Shani
Shahid Zaki
Abbas Tabish
Get Shayari on your Whatsapp
Majboori Shayari
Kamar Shayari
Protest Shayari
Zakhm Shayari
Aahat Shayari