saare lehje tire be-zamaan ek main | सारे लहजे तिरे बे-ज़माँ एक मैं

  - Mohsin Naqvi
सारेलहजेतिरेबे-ज़माँएकमैं
इसभरेशहरमेंराएगाँएकमैं
वस्लकेशहरकीरौशनीएकतू
हिज्रकेदश्तमेंकारवाँएकमैं
बिजलियोंसेभरीबारिशेंज़ोरपर
अपनीबस्तीमेंकच्चामकाँएकमैं
हसरतोंसेअटेआसमाँकेतले
जलती-बुझतीहुईकहकशाँएकमैं
मुझकोफ़ारिग़दिनोंकीअमानतसमझ
भूली-बिसरीहुईदास्ताँएकमैं
रौनक़ेंशोरमेलेझमेलेतिरे
अपनीतन्हाईकाराज़-दाँएकमैं
एकमैंअपनीहीज़िंदगीकाभरम
अपनीहीमौतपरनौहा-ख़्वाँएकमैं
उसतरफ़संग-बारीहरइकबामसे
इसतरफ़आइनोंकीदुकाँएकमैं
वोनहींहैतो'मोहसिन'येमतसोचना
अबभटकताफिरूंगाकहाँएकमैं
  - Mohsin Naqvi
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