KHud apne dil men kharaashein utaarna hongi | ख़ुद अपने दिल में ख़राशें उतारना होंगी

  - Mohsin Naqvi
ख़ुदअपनेदिलमेंख़राशेंउतारनाहोंगी
अभीतोजागकेरातेंगुज़ारनाहोंगी
तिरेलिएमुझेहँसहँसकेबोलनाहोगा
मिरेलिएतुझेज़ुल्फ़ेंसँवारनाहोंगी
तिरीसदासतुझीकोतराशनाहोगा
हवाकीचापसेशक्लेंउभारनाहोंगी
अभीतोतेरीतबीअ'तकोजीतनेकेलिए
दिलनिगाहकीशर्तेंभीहारनाहोंगी
तिरेविसालकीख़्वाहिशकेतेज़रंगोंसे
तिरेफ़िराक़कीसुब्हेंनिखारनाहोंगी
येशाइ'रीयेकिताबेंयेआयतेंदिलकी
निशानियाँयेसभीतुझपेवारनाहोंगी
  - Mohsin Naqvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy