ग़ज़ल ऐसी कहें इक लाश जी बैठे

  - Krishna Mishra
ग़ज़लऐसीकहेंइकलाशजीबैठे
पहाड़ोंकोगलेलगकरनदीबैठे
तुम्हारीलतभलाकैसीलगीहमको
जोहमइकघूॅंटमेंयेरातपीबैठे
उन्हेंआभासकैसेहोमुहब्बतजो
नहींगंगाकिनारेपरकभीबैठे
हैंहमजिसमोड़परहैवोबहुतनाज़ुक
ज़रूरीहैकिहररस्तासहीबैठे
भलेबैठाबैठातूमिरेदरपर
तिरेदरपरमगरहरदमअलीबैठे
  - Krishna Mishra
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy