क़ैद-ए-क़फ़ससेमैंकहाँअंजानहूँ
सय्यादहूँसय्यादकीपहचानहूँ
हररातआतीहैअदबसेघरमिरे
मैंआदमीहोकरकेभीइंसानहूँ
होइश्क़मुझसेेतोचलेआनामगर
मैंप्यारमेंथोड़ासाबे-ईमानहूँ
मानाहूँमैंकाफ़िरयहाँसबकेलिए
लेकिनमैंउसपत्थरकातोअरमानहूँ
पलतेहैंजानेख़्वाबकितनेआँखोंमें
फिरभीमैंमूरतएकबसबेजानहूँ