qaid-e-qafas se main kahaan anjaan hooñ | क़ैद-ए-क़फ़स से मैं कहाँ अंजान हूँ

  - Ankur Mishra
क़ैद-ए-क़फ़ससेमैंकहाँअंजानहूँ
सय्यादहूँसय्यादकीपहचानहूँ
हररातआतीहैअदबसेघरमिरे
मैंआदमीहोकरकेभीइंसानहूँ
होइश्क़मुझसेेतोचलेआनामगर
मैंप्यारमेंथोड़ासाबे-ईमानहूँ
मानाहूँमैंकाफ़िरयहाँसबकेलिए
लेकिनमैंउसपत्थरकातोअरमानहूँ
पलतेहैंजानेख़्वाबकितनेआँखोंमें
फिरभीमैंमूरतएकबसबेजानहूँ
  - Ankur Mishra
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