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Ankur Mishra
laut jaaenge parinde sab thikaane pe
laut jaaenge parinde sab thikaane pe | लौट जाऍंगे परिंदे सब ठिकाने पे
- Ankur Mishra
लौट
जाऍंगे
परिंदे
सब
ठिकाने
पे
आ
गई
है
फिर
मोहब्बत
आज़माने
पे
एक
सी
तासीर
है
दोनों
की
लेकिन
क्यूँ
कुम्हला
जाते
हैं
गुल
दिल
से
लगाने
पे
बह
रहे
हैं
अश्क
आँखों
से
मगर
फिर
भी
है
तुला
अंकुर
मुझे
जबरन
पिलाने
पे
- Ankur Mishra
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मय-कदों
में
जहाँ
मय-कशी
है
क़तरा
भर
ही
सही
रौशनी
है
जान
जानी
है
जाकर
रहेगी
किसकी
किस
सेे
यहाँ
दोस्ती
है
ख़ामख़ा
नाम
लूँ
क्यूँ
किसी
का
इश्क़
मेरी
तमन्ना
कोई
है
सामने
आ
गए
राज़
सारे
यार
लड़की
वो
पागल
बड़ी
है
माना
'अंकुर'
नहीं
सच
ये
लेकिन
मैं
भी
ख़ुश
हूँ
मुझे
भी
ख़ुशी
है
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उन
दिनों
की
कहानी
है
ये
याद
कोई
पुरानी
है
ये
ज़ख़्म
कहना
कभी
मत
इसे
यार
उसकी
निशानी
है
ये
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Ankur Mishra
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कब
कहा
है
दु'आ
दीजिए
ज़हर
मुझको
पिला
दीजिए
उम्र
काफ़ी
है
इतनी
मुझे
रुख़
से
पर्दा
हटा
दीजिए
ज़िंदगी
दे
रही
है
सदा
नाम
मेरा
बता
दीजिए
मौत
मंज़ूर
है
ये
मुझे
जिस्म
मेरा
जला
दीजिए
याद
करता
है
दिल
ये
उसे
नींद
से
अब
जगा
दीजिए
शाम
ढलने
लगी
है
बशर
अश्क
जाके
बहा
दीजिए
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Ankur Mishra
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कोई
उसको
ये
पैग़ाम
दे
सब्र
का
मेरे
वो
दाम
दे
थक
गया
हूँ
मैं
इन
वादों
से
और
मुझपे
न
इल्ज़ाम
दे
है
क़सम
तुझको
जानाँ
मिरी
याद
आए
तू
वो
नाम
दे
एक
अर्सा
हुआ
जागते
अब
तो
कोई
हसीं
शाम
दे
जल
रहा
है
तिरी
याद
में
दिल
को
थोड़ा
तो
आराम
दे
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बाद-ए-सबा
सी
बहती
है
ख़ुशबू
सी
वो
इक
लड़की
है
मैं
देखूँ
कैसे
तितलियाँ
नज़दीक
ही
वो
खिड़की
है
बरसों
से
मैं
सोया
नहीं
वो
प्यार
इतना
करती
है
है
इक
नशा
सा
उस
में
जो
ख़ामोश
लब
कर
जाती
है
सोचूँ
मैं
जब
भी
उसको
तो
क्यूँँ
याद
मेरी
आती
है
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