फ़र्ज़ अपना कभी तो निभा ज़िंदगी

  - Ankur Mishra
फ़र्ज़अपनाकभीतोनिभाज़िंदगी
हँसपडूॅंइसतरहमुस्कुराज़िंदगी
प्यासबढ़नेलगीहैतुझेदेखकर
मायनेज़िंदगीकेबताज़िंदगी
चंदक़तरेहीदामनमेंआएमिरे
ज़ोरसेशाख़अपनीहिलाज़िंदगी
जलरहेहैंचराग़ोंसेजलतेदिए
कररहीहैइशाराहवाज़िंदगी
होजाएकहींख़ाकअंकुरभीअब
फ़ासलाराब्तोंसेबढ़ाज़िंदगी
  - Ankur Mishra
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