hareef-e-matlab-e-mushkil nahin fusoon-e-niyaaz | हरीफ़-ए-मतलब-ए-मुश्किल नहीं फ़ुसून-ए-नियाज़

  - Mirza Ghalib
हरीफ़-ए-मतलब-ए-मुश्किलनहींफ़ुसून-ए-नियाज़
दु'आक़ुबूलहोयारबकिउम्र-ए-ख़िज़्रदराज़
होब-हर्ज़ाबयाबाँ-नवर्द-ए-वहम-ए-वजूद
हनूज़तेरेतसव्वुरमेंहैनशेब-ओ-फ़राज़
विसालजल्वातमाशाहैपरदिमाग़कहाँ
किदीजेआइना-ए-इन्तिज़ारकोपर्दाज़
हरएकज़र्रा-ए-आशिक़हैआफ़ताब-परस्त
गईख़ाकहुएपरहवा-ए-जल्वा-ए-नाज़
पूछवुसअत-ए-मय-ख़ाना-ए-जुनूँ'ग़ालिब'
जहाँयेकासा-ए-गर्दूंहैएकख़ाक-अंदाज़
फ़रेब-ए-सनअत-ए-ईजादकातमाशादेख
निगाहअक्स-फ़रोशख़यालआइना-साज़
ज़ि-बस-किजल्वा-ए-सय्यादहैरत-आराहै
उड़ीहैसफ़्हा-ए-ख़ातिरसेसूरत-ए-परवाज़
हुजूम-ए-फ़िक्रसेदिलमिस्ल-ए-मौजलरज़ेहै
किशीशानाज़ुकसहबा-ए-आबगीन-गुदाज़
'असद'सेतर्क-ए-वफ़ाकागुमाँवोमा'नीहै
किखींचिएपर-ए-ताइरसेसूरत-ए-परवाज़
हनूज़असर-ए-दीदनंग-ए-रुस्वाई
निगाहफ़ित्ना-ख़िरामदर-ए-दो-आलमबाज़
  - Mirza Ghalib
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