diya hai dil agar us ko bashar hai kya kahiye | दिया है दिल अगर उस को बशर है क्या कहिए

  - Mirza Ghalib
दियाहैदिलअगरउसकोबशरहैक्याकहिए
हुआरक़ीबतोहोनामा-बरहैक्याकहिए
येज़िदकिआजआवेऔरआएबिनरहे
क़ज़ासेशिकवाहमेंकिसक़दरहैक्याकहिए
रहेहैयूँँगह-ओ-बे-गहकिकू-ए-दोस्तकोअब
अगरकहिएकिदुश्मनकाघरहैक्याकहिए
ज़हेकरिश्माकियूँँदेरक्खाहैहमकोफ़रेब
किबिनकहेहीउन्हेंसबख़बरहैक्याकहिए
समझकेकरतेहैंबाज़ारमेंवोपुर्सिश-ए-हाल
कियेकहेकिसर-ए-रहगुज़रहैक्याकहिए
तुम्हेंनहींहैसर-ए-रिश्ता-ए-वफ़ाकाख़याल
हमारेहाथमेंकुछहैमगरहैक्याकहिए
उन्हेंसवालपेज़ोम-ए-जुनूँहैक्यूँँलड़िए
हमेंजवाबसेक़त-ए-नज़रहैक्याकहिए
हसदसज़ा-ए-कमाल-ए-सुख़नहैक्याकीजे
सितमबहा-ए-मता-ए-हुनरहैक्याकहिए
कहाहैकिसनेकि'ग़ालिब'बुरानहींलेकिन
सिवाएइसकेकिआशुफ़्ता-सरहैक्याकहिए
  - Mirza Ghalib
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