har ghadi barase hai baadal mujh men | हर घड़ी बरसे है बादल मुझ में

  - Mirza Athar Zia
हरघड़ीबरसेहैबादलमुझमें
कौनहैप्याससेपागलमुझमें
तुमनेरो-धोकेतसल्लीकरली
फैलताहैअभीकाजलमुझमें
मैंअधूरासाहूँउसकेअंदर
औरवोशख़्समुकम्मलमुझमें
चुपकीदीवारोंसेसरफोड़ेहै
जोइकआवाज़हैपागलमुझमें
मैंतुझेसहलबहुतलगताहूँ
तूकभीचारक़दमचलमुझमें
मुज़्दाआँखोंकोकिफिरसेफूटी
इकनएख़्वाबकीकोंपलमुझमें
काटनेहैंकईबन-बासयहीं
उगरहाहैजोयेजंगलमुझमें
आगमेंजलताहूँजबजब'अतहर'
औरजाताहैकुछबलमुझमें
  - Mirza Athar Zia
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