ham to hain hasrat-e-deedaar ke maare hue log | हम तो हैं हसरत-ए-दीदार के मारे हुए लोग

  - Mirza Athar Zia
हमतोहैंहसरत-ए-दीदारकेमारेहुएलोग
यानीइकनर्गिस-ए-बीमारकेमारेहुएलोग
जलगएधूपमेंजोउनकाशुमारएकतरफ़
कमनहींसाया-ए-दीवारकेमारेहुएलोग
तूनेवक़्तपलटकरभीकभीदेखाहै
कैसेहैंसबतेरीरफ़्तारकेमारेहुएलोग
देखतेरहतेहैंख़ुदअपनातमाशादिनरात
हमहैंख़ुदअपनेहीकिरदारकेमारेहुएलोग
रोज़हीख़ल्क़-ए-ख़ुदामरतीहैयादोबारा
ज़िंदाहोजातेहैंअख़बारकेमारेहुएलोग
तेरीदहलीज़पेइक़रारकीउम्मीदलिए
फिरखड़ेहैंतेरेइंकारकेमारेहुएलोग
  - Mirza Athar Zia
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