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Mehshar Afridi
qasam KHuda kii bade tajarbe se kahtaa hooñ
qasam KHuda kii bade tajarbe se kahtaa hooñ | क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ
- Mehshar Afridi
क़सम
ख़ुदा
की
बड़े
तजरबे
से
कहता
हूँ
गुनाह
करने
में
लज़्ज़त
तो
है
सुकून
नहीं
- Mehshar Afridi
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मैं
अगर
अपनी
जवानी
के
सुना
दूँ
क़िस्से
ये
जो
लौंडे
हैं
मेरे
पाँव
दबाने
लग
जाए
Mehshar Afridi
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
Mehshar Afridi
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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चंद
गज़
की
शहरियत
किस
काम
की
उड़ना
आता
है
तो
छत
किस
काम
की
जब
तुम्हें
चेहरे
बदलने
का
है
शौक़
फिर
तुम्हारी
असलियत
किस
काम
की
पूछने
वाला
नहीं
कोई
मिजाज़
इस
क़दर
भी
ख़ैरियत
किस
काम
की
हम
भी
कपड़ों
को
अगर
तरजीह
दें
फिर
हमारी
शख़्सियत
किस
काम
की
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Mehshar Afridi
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