tadapna bhi dekha na bismil ka apne | तड़पना भी देखा न बिस्मिल का अपने

  - Meer Taqi Meer
तड़पनाभीदेखाबिस्मिलकाअपने
मैंकुश्ताहूँअंदाज़-ए-क़ातिलकाअपने
पूछोकिअहवालना-गुफ़्ता-बहहै
मुसीबतकेमारेहुएदिलकाअपने
दिल-ए-ज़ख़्म-ख़ुर्दाकेऔरइकलगाई
मुदावाक्याख़ूबघाइलकाअपने
जोख़ोशाथासदख़िर्मन-ए-बर्क़थायाँ
जलायाहुआहूँमैंहासिलकाअपने
टकअबरूकोमेरीतरफ़कीजेमाइल
कभूदिलभीरखलीजेमाइलकाअपने
हुआदफ़्तर-ए-क़ैसआख़िरअभीयाँ
सुख़नहैजुनूँकेअवाएलकाअपने
बनाएँरखेंमैंनेआलममेंक्याक्या
हूँबंदाख़यालातबातिलकाअपने
मक़ाम-ए-फ़नावाक़िएमेंजोदेखा
असरभीथागोरमंज़िलकाअपने
  - Meer Taqi Meer
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