shab sham'a par patang ke aane ko ishq haius dil-jale ke taab ke laane ko ishq hai | शब शम्अ' पर पतंग के आने को इश्क़ है

  - Meer Taqi Meer
शबशम्अ'परपतंगकेआनेकोइश्क़है
उसदिल-जलेकेताबकेलानेकोइश्क़है
सरमारमारसंगसेमर्दानाजीदिया
फ़रहादकेजहानसेजानेकोइश्क़है
उठियोसमझकेजासेकिमानिंद-ए-गर्द-बाद
आवारगीसेतेरीज़मानेकोइश्क़है
बससिपहरसईसेतेरीतोरोज़-ओ-शब
याँग़मसतानेकोहैजलानेकोइश्क़है
बैठीजोतेग़-ए-यारतोसबतुझकोखागई
सीनेतेरेज़ख़्मउठानेकोइश्क़है
इकदममेंतूनेफूँकदियादो-जहाँकेतीं
इश्क़तेरेआगलगानेकोइश्क़है
सौदाहोतबहो'मीर'कोतोकरिएकुछइलाज
उसतेरेदेखनेकेदिवानेकोइश्क़है
  - Meer Taqi Meer
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