kuchh mauj-e-hawa pechaan ai meer nazar aayi | कुछ मौज-ए-हवा पेचाँ ऐ 'मीर' नज़र आई

  - Meer Taqi Meer
कुछमौज-ए-हवापेचाँ'मीर'नज़रआई
शायदकिबहारआईज़ंजीरनज़रआई
दिल्लीकेथेकूचेऔराक़-ए-मुसव्वरथे
जोशक्लनज़रआईतस्वीरनज़रआई
मग़रूरबहुतथेहमआँसूकीसरायतपर
सोसुब्हकेहोनेकोतासीरनज़रआई
गुल-बारकरेहैगाअसबाब-ए-सफ़रशायद
ग़ुंचेकीतरहबुलबुलदिल-गीरनज़रआई
उसकीतोदिल-आज़ारीबे-हेचहीथीयारो
कुछतुमकोहमारीभीतक़्सीरनज़रआई
  - Meer Taqi Meer
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