karte hi nahin tark-e-butaan taur-e-jafa ka | करते ही नहीं तर्क-ए-बुताँ तौर-ए-जफ़ा का

  - Meer Taqi Meer
करतेहीनहींतर्क-ए-बुताँतौर-ए-जफ़ाका
शायदहमींदिखलावेंगेदीदारख़ुदाका
हैअब्रकीचादरशफ़क़ीजोशसेगुलके
मयख़ानेकेहाँदेखिएयेरंगहवाका
बहुतेरीगिरोजिंस-कुलालोंकेपड़ीहै
क्याज़िक्रहैवाइ'ज़केमुसल्ला-ओ-रिदाका
मरजाएगाबातोंमेंकोईग़म-ज़दायूँँही
हरलहज़ाहोमुम्तहिनअरबाब-ए-वफ़ाका
तदबीरथीतस्कींकेलिएलोगोंकीवर्ना
मा'लूमथामुद्दतसेहमेंनफ़ादवाका
हाथआईना-रूयोंसेउठाबैठेंक्यूँँकर
बिल-अकसअसरपातेथेहमअपनीदु'आका
आँखउसकीनहींआईनेकेसामनेहोती
हैरत-ज़दाहूँयारकीमैंशर्म-ओ-हयाका
बरसोंसेतूयूँँहैकिघटाजबउमँडआई
तबदीदा-ए-तरसेभीहुआएकझड़ाका
आँखउससेनहींउठनेकीसाहबनज़रोंकी
जिसख़ाकपेहोगाअसरउसकीकफ़-ए-पाका
तलवारकेसाएहीमेंकाटेहैतो'मीर'
किसदिल-ज़दाकोहुएहैयेज़ौक़फ़नाका
  - Meer Taqi Meer
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