jaana ki shaghl rakhte ho teer-o-kamaan se tum | जाना कि शग़्ल रखते हो तीर-ओ-कमाँ से तुम

  - Meer Taqi Meer
जानाकिशग़्लरखतेहोतीर-ओ-कमाँसेतुम
परमिलचलाकरोभीकसोख़स्ता-जाँसेतुम
हमअपनीचाकजेबकोसीरहतेयानहीं
फाटेमेंपाँवदेनेकोआएकहाँसेतुम
अबदेखतेहैंख़ूबतोवोबातहीनहीं
क्याक्यावगर्नाकहतेथेअपनीज़बाँसेतुम
तिनकेभीतुमठहरतेकहींदेखेहैंतनिक
चश्म-ए-वफ़ारखोख़सान-ए-जहाँसेतुम
जाओदिलसेमंज़र-ए-तनमेंहैजायही
पछताओगेउठोगेअगरइसमकाँसेतुम
क़िस्सामिरासुनोगेतोजातीरहेगीनींद
आरामचश्ममतरखोइसदास्ताँसेतुम
खुलजाएँगीफिरआँखेंजोमरजाएगाकोई
आतेनहींहोबाज़मिरेइम्तिहाँसेतुम
जितनेथेकलतुमआजनहींपातेइतनाहम
हर-दमचलेहीजातेहोआब-ए-रवाँसेतुम
रहतेनहींहोबनगए'मीर'उसगलीमेंरात
कुछराहभीनिकालोसग-ओ-पास्बाँसेतुम
  - Meer Taqi Meer
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