guzra bana-e-charkh se naala paagaah ka | गुज़रा बना-ए-चर्ख़ से नाला पगाह का

  - Meer Taqi Meer
गुज़राबना-ए-चर्ख़सेनालापगाहका
ख़ाना-ख़राबहोजियोइसदिलकीचाहका
आँखोंमेंजीमिराहैउधरदेखतानहीं
मरताहूँमेंतोहाएरेसर्फ़ानिगाहका
सदख़ानुमाँ-ख़राबहैंहरहरक़दमपेदफ़न
कुश्ताहूँयारमैंतोतिरेघरकीराहका
यकक़तराख़ूनहोकेपलकसेटपकपड़ा
क़िस्सायेकुछहुआदिलग़फ़राँ-पनाहका
तलवारमारनातोतुम्हेंखेलहैवले
जातारहेजानकसोबे-गुनाहका
बद-नाम-ओ-ख़ार-ओ-ज़ार-ओ-नज़ार-ओ-शिकस्ता-हाल
अहवालकुछपोछिएउसरू-सियाहका
ज़ालिमज़मींसेलौटतादामनउठाकेचल
होगाकमींमेंहाथकसोदाद-ख़्वाहका
ताज-ए-शहसरकोफ़रवलाऊँतेरेपास
हैमो'तक़िदफ़क़ीरनमदकीकुलाहका
हरलख़्त-ए-दिलमेंसैदकेपैकानभीगए
देखामैंशोख़ठाठतिरीसैद-ए-गाहका
बीमारतूहोवेजिएजबतलककि'मीर'
सोनेदेगाशोरतिरीआहआहका
  - Meer Taqi Meer
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